top of page

संक्रांति का अर्थ और सूर्य देव

संक्रांति' का अर्थ संक्रमण अर्थात प्रवेश करना है, सूर्य का एक राशि से दूसरी में प्रवेश करने का समय । विशेष - प्राय: सूर्य एक राशि में 3० दिन तक रहता हैं । और जब वह एक राशि से निकलकर दूसरी राशि में जाता है, तब उसे संक्रांति कहते हैं ।

वास्तव में संक्रांति काल वही होता है जब सूर्य दो राशियों की ठीक सीमा पर या बीच में होता हैं । यह संक्रांति काल बहुत थोड़ा होता है ।


पुराणानुसार यह काल बहुत पुनीत माना जाता है और इस समय लोग स्नान, दान, पूजन इत्यादि करते हैं । इस समय का किया हुआ शुभ कार्य बहुत पुण्यजनक माना जाता है ।


15 जून को मिथुन संक्रांति है। इस दिन सूर्य मिथुन राशि में प्रवेश कर जाएंगे। सूर्य के राशि परिवर्तन को संक्रांति कहा जाता है। सूर्य जिस राशि में प्रवेश करते है संक्रांति का नाम उसी अनुसार पड़ता है। जैसे- 15 जून को सूर्य मिथुन राशि में प्रवेश कर रहे हैं, जिस वजह से इसे मिथुन संक्रांति कहा जाएगा।


संस्कार क्रिया से शरीर, मन और आत्मा मे समन्वय और चेतना होती है, कृप्या अपने प्रश्न साझा करे, हम सदैव तत्पर रहते है आपके प्रश्नो के उत्तर देने के लिया, प्रश्न पूछने के लिया हमे ईमेल करे sanskar@hindusanskar.org संस्कार और आप, जीवन शैली है अच्छे समाज की, धन्यवाद् 

9 views0 comments
bottom of page