top of page

शिवलिंग पर क्या नहीं चढ़ाते ?

शिवलिंग पर नारियल को चढ़ाया जा सकता है लेकिन नारियल के जल से शिवलिंग का अभिषेक नहीं करते हैं क्योंकि हम जो भी वस्तु अर्पित करते हैं उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं जबकि अभिषेक किए गए पदार्थों का सेवन नहीं किया जाता है। इसलिए नारियल के पानी से शिव का अभिषेक नहीं किया जाता है।

हल्दी को शुभ माना जाता है और सभी पूजा पाठ के कामों में हल्दी का प्रयोग किया जाता है, और हल्दी को सौन्दर्य का प्रतीक भी माना गया है। जबकि भगवान शिव बैरागी हैं। इसलिए शिव की पूजा या अभिषेक में हल्दी का प्रयोग नहीं किया जाता है।

कुमकुम या सिंदूर सुहाग की निशानी होता है। इसलिए सिंदूर माता पार्वती को अर्पित कर सकते हैं लेकिन भगवान शिव को चंदन या भस्म का टीका लगाना चाहिए। भगवान शिव को सिंदूर न चढ़ाने का एक कारण यह भी माना जाता है कि शिव विनाशक हैं। जबकि स्त्रियां अपने पति की लंभी आयु के लिए भगवान को सिंदूर अर्पित करती हैं।

तुलसी के पत्तों को औषधिय गुणों से भरपूर माना जाता है। इन्हें बहुत ही पवित्र माना गया है इसलिए तुलसी को पूजा जाता हैं लेकिन शिव जी को तुलसी नहीं चढ़ाई जाती है। तुलसी के पति जांलधर जो एक असुर था, भगवान शिव ने उसका अंत किया था जिसके कारण तुलसी ने शिव जी को अपने औषधिय गुणों से उन्हें वंचित कर दिया।

शंखचूड़ नाम का एक दैत्य था। जिसके अत्याचारों से सभी देवता परेशान थे। भगवान शिव ने अपने त्रिशुल से उस राक्षस का वध किया था। जिसकी भस्म से शंख की उत्पत्ति हुई। इसलिए शिव जी को शंख से जल नहीं चढ़ाया जाता है।

संस्कार क्रिया से शरीर, मन और आत्मा मे समन्वय और चेतना होती है

Comments


bottom of page