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गणगौर व्रत और पूजा क्यों मानते है?

गणगौर पर्व चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस बार 04 अप्रैल, सोमवार को व्रत रखा जाएगा। गण का अर्थ है शिव और गौर मां पार्वती हैं। इसमें शिव पार्वती की मिट्टी की मूर्ति बनाकर सोलह श्रृंगार किया जाता है।


मान्यता


मान्यता है कि यह व्रत रखने से सुहागिनों को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है व इस दिन ही माता पार्वती सभी को अखंड सुहाग देने के लिए निकली थीं और स्त्रियों को सुहाग रस बांटा था। सुहागनें गौर को अर्पित सिंदूर से अपनी मांग भरती हैं। पर्व पर मीठे-नमकीन गुने बनाने की परंपरा भी है। बाद में परिवार की महिलाएं ये आटे-बेसन सेव गुने एक-दूसरे को बांटती हैं। ये गहनों का ही प्रतीक होते हैं।


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