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गुड़ी पड़वा क्यों बनायीं जाती है ?

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा हिंदू पंचांग का प्रथम दिन माना जाता है, जिसमें उसके नव वर्ष का आरंभ होता है। कई स्थानों पर इसे उगादि, युग+आदि अर्थात उगादि कहते हैं।


इस साल यह पर्व 2 अप्रैल, शनिवार को ही मनाया जाएगा इसी दिन से नवरात्रि की शुरुआत होगी। महाराष्ट्र में और बहुत से स्थानों में इसे नव संवत्सर का आरंभ होना भी माना जाता है।


पंचांग ज्योतिष और सनातन धर्म परंपरा में नव संवत्सर का एक विशेष गुड़ी बनाने की महत्व है जो इस इस तरह चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन से ही आरंभ होता है।

ऐसी मान्यता है कि भारतीय पंचांग का आरंभ भी महान विद्वान भास्कराचार्य द्वारा इस दिन से ही आरंभ किया गया था। नक्षत्र तिथि वार गणना के संपूर्ण गणितीय आधारों पर काल निर्णय का उपयोग हुआ था।


आयुर्वेद के कई विद्वानों का यह भी मत है कि इस दिन नीम के पत्तों की छोटी गोली और गुड़ खाने से पराग कणों से उत्पन्न बीमारियां एलर्जी ज्वर पीड़ा आदि के रोगियों को निदान प्राप्त होता है।


गुड़ी पड़वा क्यों बनायीं जाती है ?

माना जाता है कि इस दिन भगवान राम ने बाली का वध किया था, इसलिए इस दिन को विजय दिवस के रूप में भी मनाया जाता है, जिसमें सभी नकारात्मक भावनाओं को दूर करने के लिए गुड़ी यानी शुभ ध्वज के ध्वज की पूजा की जाती है।

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